शनिवार, 28 जुलाई 2012

अपराधी अफसरों का पनाहगा, छत्तीसगढ़..?


  छत्तीसगढ़ इस समय बन गया है अपराधी और भ्रष्ट अफसरों का पनाहगाह, और इस विभाग के मंत्री लाचारी में कहते हैं कि कोई कमिश्नर बन गया है हम अब कार्रवाई नहीं कर सकते तो कहीं कहते हैं कि कार्रवाई कर करुं किसपर करुं सभी तो हैं अपराधी और भ्रष्ट...।

 
छत्तीसगढ़ भ्रष्ट अफसरों का पनाहगार बन गया है....जहां अंत्यावसायी सहकारी विकास निगम के सभी 18 जिलों के अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं...जिनके खिलाफ गबन, आर्थिक अपराध, धोखाधड़ी जैसे कई मामले दर्ज हैं...उसके बाद भी उनका प्रमोशन किया जा रहा है...सवाल किसी अधिकारी के प्रमोशन पर खड़ा नहीं हुआ उससे बड़ा सवाल बना प्रदेश के इसी विभाग के मंत्री का बयान जब इस बारे में मैंने उन्हें बताया कि इतना भ्रष्टाचार व्याप्त है कुछ कीजिए तो उन्होंने हंसते बड़े उदासीनता भरे लहजे में कहा कि क्या करें पूरे प्रदेश के अधिकारी के अपराधी हैं..सभी पर कार्रवाई कर देंगें को प्रदेश का काम काज कैसे चलेगा...इन अफसर शायद ये जानते हैं कि उनके मंत्री तो ऐसे ही हैं जिन्हें कुछ पता ही नहीं चलेगा आदिवासी इलाके आए हैं...कुछ समझेंगें ही नहीं कि गबन, और धोखाधड़ी का मतलब क्या होता है...अपराध और भ्रष्टाचार तो केवल लोगों से सुने होंगे...लेकिन मंत्री जी का बयान देकर ये शायद जताना चाहते हैं कि उन्हें सब पता है...लेकिन उनके बयान पर सवालिया निशान जरुर लग गया...उन्हीं की बात उन्हीं की जुबानी कुछ इस तरह...उनका कहना है कि यदि हम 18 जिलों के सभी भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई कर देंगे तो काम कैसे चलेगा....हमारा तो काम काज बी ठप्प हो जाएगा...अब ऐसे में काम चलाने के लिए इन पर कार्रवाई नहीं कर सकते ...जहां ज्यादा भ्रष्टाचार की बात है तो देखते हैं जो ज्यादा भ्रष्टाचार कर रहा होगा उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे...अब क्या कहें ऐसे मंत्री जी को उनकी ये लाचारी है या...बेकूफी जो उन्हें ये बताने में फक्र महसूस हो रहा है कि उनके विभाग में कितना भ्रष्टाचार व्याप्त है...वैसे खुशी भी होती होगी कि सभी क्रिमिनल भी जो उनसे लोग डरते भी होंगे...ये छत्तीसगढ़ के मंत्री हैं अनुसूचित जनजाति विभाग के केदार कश्यप जिनके विभाग में ऐसा है और उन्होने ऐसा कुछ बयान दिया...क्या कहें अब ज्यादा इनके बारे में बेचारे लाचार हैं...करें भी तो क्या करें सभी तरफ से परेशान होंगे..मतलब..।??????????

लाल आतंक की साजिश में फंसा पुलिस विभाग



          लाल आतंक की साजिश में फंसा पुलिस विभाग

नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के बीच में सेंध करके अपने लोगों को पहुंचाकर जहां उनकी रणनीति को समझ रहे हैं तो वहीं, उनसे गोला बारुद के साथ हथियार भी मंगवा रहे हैं., विभाग इनकी रणनीति से बेखबर रहा और नक्सलियों की काली करतूत से तब वाकिफ हुए जब खुलेआम उनके साथ रहकर हथियार लेकर हुए फरार..।
 -छत्तीसगढ़ में लाल आतंक का चेहरा और उसकी रणनीतियां खौफनाक होती जा रही हैं। .जहां अब नक्सलियों ने एक नई रणनीति तैयार की है...आईबी और केन्द्रीय गृहविभाग ने छत्तीसगढ़ शासन को एलर्ट भी किया है....कि जो नक्सली सरेंडर कर रहे हैं उनकी जांच पड़ताल के बाद ही उन्हें जवानों की सेना में शामिल किया जाए...छत्तीसगढ़ में अब तक सरेंडर किए नक्सलियों में 146 नक्सलियों को नौकरी दी गई है जिसमें उन्हें एसपीओ, सिपाही और आरक्षक बनाया गया है... वहीं अब तक छत्तीसगढ़ में 2632 नक्सलियों ने सरेंडर किया है या फिर पुलिस ने उन्हें पकड़ा है जिसके बाद उन्होंने विचार धारा बदली है...सावधान करने के बाद भी पुलिस विभाग की आंखें नहीं खुली और धमतरी में सरेंडर किए नक्सली दंपत्ति हथियार गोलाबारुद लेकर एक महीने तक इनके बीच रहकर फरार हो गया..और साथ ले गए इनकी रणनीतियां..।नक्सलियों की साजिस उनके घुसपैठ की जो सुरक्षा बलो के मुमेंट और उनकी हर रणनीति को समझने के लिए वे ऐसा करते हैं ये विभाग की समझ से परे रहा है....।
 खुफिया विभाग औऱ केन्द्रीय गृहविभाग ने रिपोर्ट दी कि घोर नक्सल प्रभावित इलाकों के अधिकारी सतर्क हो जाएं और सरेंडर करने वाले नक्सलियों को परखने के बाद ही उन्हें अपने साथ रखें....लेकिन देखा गया है कि कई नक्सलियों को सरेंडर करने के बाद उन्हें सुरक्षा बलों के सामान रखा गया है....छत्तीसगढ़ में अब तक 2632 नक्सली सामने आ चुके हैं..जिसमें या तो उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया है या फिर नक्सलियों ने पुलिस के सामने सरेंडर किया है..सरेंडर किए नक्सलियों को विशेष नीति के आधार पर 146 नक्सलियों को सरेंडर करने के बाद एसपीओ, सिपाही और आरक्षक बनाया गया है...जिन्होंने जवानों की तरह देश की रक्षा की कसमें खाई है...लेकिन इनके बीच में अब नक्सलियों के भेदी भी पहुंच गए हैं...।
सरेंडर करने वाले नक्सलियों में कितने नक्सली शामिल हुए
     2005- 13 सरेंडर नक्सली बने एसपीओ
     2006 में 5 नक्सलियों को बनाया गया
     2007 में बड़ी तादात में  90 नक्सलियों को बनाया गया
     2008  5 नक्सली बने एसपीओ और सिपाही
     2009- में 3 नक्सलियों को बनाया गया सिपाही
     2010 में 4 को बनाया गया एसपीओ
     2011 में 18 नक्सली बने आरक्षक और सिपाही
     2012 में अब तक 9 नक्सलियों को बनाया जा चुका है आरक्षक और नव आरक्षक बनाया गया है..।
इस तरह 146 लोगों को वर्दी दी गई और जवानों की तरह इन्होंने भी देश की रक्षा की सौगंध खाई है....लेकिन यहां अब होने लगी है साजिस... जहां नक्सलियों ने अपने लोगों को सरेंडर करवा कर जवानों में शामिल करवाकर रहे है जासूसी करवा रहे हैं...इतना ही नहीं जानकारी तो ये भी आई है कि ये नक्सलियों तक गोला बारुद और हथियार पहुंचाते हैं...बीच में जब नक्सलियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया और जब सुरक्षा बलों से इनकी मुठभेड़ हुई तो इनकी आंखें खुली जिसके बाद सतर्क रहने को कहा गया...लेकिन ये तब भी नहीं नक्सलियों की चाल को नहीं समझ पाए आंखे तब खुली जब दो नक्सली लंबे समय तक सरेंडर करने के बाद थाने में रखे गोला बारुद हथियार लेकर फरार हो गए... वहीं एडीजी नक्सल ऑपरेशन राम निवास का कहना है कि हमारे अधिकारी पूरी तरह से जांच पड़ताल के बाद ही उन्हें जिम्मेदारी सौंपते  हैं..तो आखिर इसे अब क्या कहें...कि नक्सलियों के रणनीति के आगे उनकी रणनीतियों और साजिस के सामने अफसर बिफल रहे हैं...। नक्सलियों की साजिश अब बेपर्दा हो गई है और उनका काला चेहरा भी सामने है...अब सवाल रहा है कि लगातार नक्सलियों से मात खा रही छत्तीसगढ़ पुलिस अब जो घर के भेदिए हैं क्या उनसे निपट पाएगी..या फिर उनकी साजिश में फंसेगी...या इनसे कैसे निपटेगी जो एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है..।

कमलेश पाण्डेय रायपुर


गुरुवार, 22 मार्च 2012


 छत्तीसगढ़ भ्रष्ट अफसरों का पनाहगार बन गया है....जहां अंत्यावसायी सहकारी विकास निगम के सभी 18 जिलों के अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं...जिनके खिलाफ गबन, आर्थिक अपराध, धोखाधड़ी जैसे कई मामले दर्ज हैं...उसके बाद भी उनका प्रमोशन किया जा रहा है...सवाल किसी अधिकारी के प्रमोशन पर खड़ा नहीं हुआ उससे बड़ा सवाल बना प्रदेश के इसी विभाग के मंत्री का बयान जब इस बारे में मैंने उन्हें बताया कि इतना भ्रष्टाचार व्याप्त है कुछ कीजिए तो उन्होंने हंसते बड़े उदासीनता भरे लहजे में कहा कि क्या करें पूरे प्रदेश के अधिकारी के अपराधी हैं..सभी पर कार्रवाई कर देंगें को प्रदेश का काम काज कैसे चलेगा...इन अफसर शायद ये जानते हैं कि उनके मंत्री तो ऐसे ही हैं जिन्हें कुछ पता ही नहीं चलेगा आदिवासी इलाके आए हैं...कुछ समझेंगें ही नहीं कि गबन, और धोखाधड़ी का मतलब क्या होता है...अपराध और भ्रष्टाचार तो केवल लोगों से सुने होंगे...लेकिन मंत्री जी का बयान देकर ये शायद जताना चाहते हैं कि उन्हें सब पता है...लेकिन उनके बयान पर सवालिया निशान जरुर लग गया...उन्हीं की बात उन्हीं की जुबानी कुछ इस तरह...उनका कहना है कि यदि हम 18 जिलों के सभी भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई कर देंगे तो काम कैसे चलेगा....हमारा तो काम काज बी ठप्प हो जाएगा...अब ऐसे में काम चलाने के लिए इन पर कार्रवाई नहीं कर सकते ...जहां ज्यादा भ्रष्टाचार की बात है तो देखते हैं जो ज्यादा भ्रष्टाचार कर रहा होगा उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे...अब क्या कहें ऐसे मंत्री जी को उनकी ये लाचारी है या...बेकूफी जो उन्हें ये बताने में फक्र महसूस हो रहा है कि उनके विभाग में कितना भ्रष्टाचार व्याप्त है...वैसे खुशी भी होती होगी कि सभी क्रिमिनल भी जो उनसे लोग डरते भी होंगे...ये छत्तीसगढ़ के मंत्री हैं अनुसूचित जनजाति विभाग के केदार कश्यप जिनके विभाग में ऐसा है और उन्होने ऐसा कुछ बयान दिया...क्या कहें अब ज्यादा इनके बारे में बेचारे लाचार हैं...करें भी तो क्या करें सभी तरफ से परेशान होंगे..मतलब..।??????????

बाबाओं का क्या करें...

10 साल पहले करीब करीब सभी सरकारी स्कू्लों से ही पढ़कर आए हैं..यही नहीं वो बाबा जो श्री श्री रविशंकर बन बैठे हैं...वो भी वहीं मौका मिला होगा तो निकले होंगे...और अब कह रहे हैं कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले नक्सली होते हैं...ऐसे बाबाओं का क्या कहें कैसे लोग संरक्षण दे रहे हैं...ये भी कह सकते हैं कि शायद माओवादियों का इन साया चढ़ गया होगा...जो बाबा बोलना चाह रहे थे कि नक्सली बढ़िया काम कर रहे हैं....लेकिन क्या कहें...या बाबा कोई बड़ा स्कूल खोलने वाले होंगे उसका प्रमोशन करने लगे हों उसमें पढ़ो तो नक्सली नहीं बनोगे...बाबा गीरी सीखेगो...जो उनके जैसे लोगों बर्बाद करोगे और खुद आबाद रहोगे.....इन बाबाओं का क्या किया जाए ये भी एक सवाल बन गया है...जो बूढ़े होने के बाद इनके जैसे बाबा ज्ञानता का पाठ पढ़ाने की राह में निकल पड़ते हैं..