छत्तीसगढ़ भ्रष्ट अफसरों का पनाहगार बन गया है....जहां अंत्यावसायी सहकारी विकास निगम के सभी 18 जिलों के अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं...जिनके खिलाफ गबन, आर्थिक अपराध, धोखाधड़ी जैसे कई मामले दर्ज हैं...उसके बाद भी उनका प्रमोशन किया जा रहा है...सवाल किसी अधिकारी के प्रमोशन पर खड़ा नहीं हुआ उससे बड़ा सवाल बना प्रदेश के इसी विभाग के मंत्री का बयान जब इस बारे में मैंने उन्हें बताया कि इतना भ्रष्टाचार व्याप्त है कुछ कीजिए तो उन्होंने हंसते बड़े उदासीनता भरे लहजे में कहा कि क्या करें पूरे प्रदेश के अधिकारी के अपराधी हैं..सभी पर कार्रवाई कर देंगें को प्रदेश का काम काज कैसे चलेगा...इन अफसर शायद ये जानते हैं कि उनके मंत्री तो ऐसे ही हैं जिन्हें कुछ पता ही नहीं चलेगा आदिवासी इलाके आए हैं...कुछ समझेंगें ही नहीं कि गबन, और धोखाधड़ी का मतलब क्या होता है...अपराध और भ्रष्टाचार तो केवल लोगों से सुने होंगे...लेकिन मंत्री जी का बयान देकर ये शायद जताना चाहते हैं कि उन्हें सब पता है...लेकिन उनके बयान पर सवालिया निशान जरुर लग गया...उन्हीं की बात उन्हीं की जुबानी कुछ इस तरह...उनका कहना है कि यदि हम 18 जिलों के सभी भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई कर देंगे तो काम कैसे चलेगा....हमारा तो काम काज बी ठप्प हो जाएगा...अब ऐसे में काम चलाने के लिए इन पर कार्रवाई नहीं कर सकते ...जहां ज्यादा भ्रष्टाचार की बात है तो देखते हैं जो ज्यादा भ्रष्टाचार कर रहा होगा उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे...अब क्या कहें ऐसे मंत्री जी को उनकी ये लाचारी है या...बेकूफी जो उन्हें ये बताने में फक्र महसूस हो रहा है कि उनके विभाग में कितना भ्रष्टाचार व्याप्त है...वैसे खुशी भी होती होगी कि सभी क्रिमिनल भी जो उनसे लोग डरते भी होंगे...ये छत्तीसगढ़ के मंत्री हैं अनुसूचित जनजाति विभाग के केदार कश्यप जिनके विभाग में ऐसा है और उन्होने ऐसा कुछ बयान दिया...क्या कहें अब ज्यादा इनके बारे में बेचारे लाचार हैं...करें भी तो क्या करें सभी तरफ से परेशान होंगे..मतलब..।??????????
गुरुवार, 22 मार्च 2012
बाबाओं का क्या करें...
10 साल पहले करीब करीब सभी सरकारी स्कू्लों से ही पढ़कर आए हैं..यही नहीं वो बाबा जो श्री श्री रविशंकर बन बैठे हैं...वो भी वहीं मौका मिला होगा तो निकले होंगे...और अब कह रहे हैं कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले नक्सली होते हैं...ऐसे बाबाओं का क्या कहें कैसे लोग संरक्षण दे रहे हैं...ये भी कह सकते हैं कि शायद माओवादियों का इन साया चढ़ गया होगा...जो बाबा बोलना चाह रहे थे कि नक्सली बढ़िया काम कर रहे हैं....लेकिन क्या कहें...या बाबा कोई बड़ा स्कूल खोलने वाले होंगे उसका प्रमोशन करने लगे हों उसमें पढ़ो तो नक्सली नहीं बनोगे...बाबा गीरी सीखेगो...जो उनके जैसे लोगों बर्बाद करोगे और खुद आबाद रहोगे.....इन बाबाओं का क्या किया जाए ये भी एक सवाल बन गया है...जो बूढ़े होने के बाद इनके जैसे बाबा ज्ञानता का पाठ पढ़ाने की राह में निकल पड़ते हैं..
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