गुरुवार, 22 मार्च 2012

बाबाओं का क्या करें...

10 साल पहले करीब करीब सभी सरकारी स्कू्लों से ही पढ़कर आए हैं..यही नहीं वो बाबा जो श्री श्री रविशंकर बन बैठे हैं...वो भी वहीं मौका मिला होगा तो निकले होंगे...और अब कह रहे हैं कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले नक्सली होते हैं...ऐसे बाबाओं का क्या कहें कैसे लोग संरक्षण दे रहे हैं...ये भी कह सकते हैं कि शायद माओवादियों का इन साया चढ़ गया होगा...जो बाबा बोलना चाह रहे थे कि नक्सली बढ़िया काम कर रहे हैं....लेकिन क्या कहें...या बाबा कोई बड़ा स्कूल खोलने वाले होंगे उसका प्रमोशन करने लगे हों उसमें पढ़ो तो नक्सली नहीं बनोगे...बाबा गीरी सीखेगो...जो उनके जैसे लोगों बर्बाद करोगे और खुद आबाद रहोगे.....इन बाबाओं का क्या किया जाए ये भी एक सवाल बन गया है...जो बूढ़े होने के बाद इनके जैसे बाबा ज्ञानता का पाठ पढ़ाने की राह में निकल पड़ते हैं.. 

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